Leave your feedback Share Copy URL https://wrmj.com/video/BfQ9bxGQSSL.html Email Facebook Twitter LinkedIn Pinterest Tumblr Share on Facebook Share on Twitter UP: Jauhar University पर ख़तरा, स्टूडेंट्स और स्टाफ़ को ये डर- ग्राउंड रिपोर्ट (BBC Hindi) [Ea2tFbnMfRK] Health Updated on August 11, 2026 EDT — Published on August 11, 2026 EDT उत्तर प्रदेश का रामपुर साक्षरता के मामले में प्रदेश के सबसे पिछड़े ज़िलों में से एक है. इसी ज़िले में आज से क़रीब दो दशक पहले मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की नींव रखी गई. यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक़, मौजूदा वक़्त में तीन हज़ार छात्र यहां पढ़ाई कर रहे हैं. क़रीब 100 टीचिंग और सौ के ही क़रीब नॉन टीचिंग स्टाफ़ कार्यरत हैं. लेकिन प्रशासन के एक फ़ैसले के बाद से इस विश्वविद्यालय का भविष्य सवालों के घेरे में है. छात्रों को अपनी पढ़ाई अधूरी छूट जाने का डर है और कर्मचारियों के सामने रोज़गार छिन जाने का संकट. रिपोर्टर: प्रेरणा वीडियो जर्नलिस्ट: तारिक़ ख़ान #up #rampur BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें. BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह. (कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.) * बीबीसी हिंदी से आप इन सोशल मीडिया चैनल्स पर भी जुड़ सकते हैं- फ़ेसबुक- ट्विटर- इंस्टाग्राम- व्हाट्सऐप- gyEqjsuSA3K GND6bFbtqrn stHZx43jyfI OcnFjfislYB wQpcGvT0gTI Oo9yTVah80f epgqL159dMY
उत्तर प्रदेश का रामपुर साक्षरता के मामले में प्रदेश के सबसे पिछड़े ज़िलों में से एक है. इसी ज़िले में आज से क़रीब दो दशक पहले मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की नींव रखी गई. यूनिवर्सिटी एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक़, मौजूदा वक़्त में तीन हज़ार छात्र यहां पढ़ाई कर रहे हैं. क़रीब 100 टीचिंग और सौ के ही क़रीब नॉन टीचिंग स्टाफ़ कार्यरत हैं. लेकिन प्रशासन के एक फ़ैसले के बाद से इस विश्वविद्यालय का भविष्य सवालों के घेरे में है. छात्रों को अपनी पढ़ाई अधूरी छूट जाने का डर है और कर्मचारियों के सामने रोज़गार छिन जाने का संकट. रिपोर्टर: प्रेरणा वीडियो जर्नलिस्ट: तारिक़ ख़ान #up #rampur BBC World Service के नए ऐप को डाउनलोड करें. BBC News हिन्दी को चुनें और पाइए न्यूज़ अलर्ट, लाइव टीवी, पॉडकास्ट... सब एक जगह. (कृपया नोट करें: नया ऐप ब्रिटेन और अमेरिका में उपलब्ध नहीं है.) * बीबीसी हिंदी से आप इन सोशल मीडिया चैनल्स पर भी जुड़ सकते हैं- फ़ेसबुक- ट्विटर- इंस्टाग्राम- व्हाट्सऐप- gyEqjsuSA3K GND6bFbtqrn stHZx43jyfI OcnFjfislYB wQpcGvT0gTI Oo9yTVah80f epgqL159dMY